शत्रुंजय मंडन सुखकारी, आदिनाथ प्रभु मंगलकारी।मरुदेवी माता के नंदन, कोटि वार करूँ तुम वंदन।कनक वरण प्रभु देह सुहावे, देखत नयन महासुख पावे।तुम हो देवों के देव महान, दीजो मोहे केवलज्ञान।
(यहाँ आदिनाथ भगवान का सबसे प्रिय स्तवन, जैसे कि "अंगूठे अमरीझ झरे..." या कोई अन्य भक्ति पद गाएं)
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं अर्हंत बिम्बाय नमः। palitana 5 chaityavandan in hindi full
(यहाँ एक नवकार मंत्र गिनें और खमासमण दें)
: The final devotional act of the yatra, celebrating the glory of Lord Rishabhdev (Adinath). Pilgrimage Logistics शत्रुंजय मंडन सुखकारी
4. चतुर्थ चैत्यवंदन: साढबा माता (शैलपुत्री / अंबिका माता)
इस वंदन में श्रद्धालु व्रत लेता है- "आज पूरे दिन मैं बोलूंगा तो केवल प्रभु का नाम, खाऊंगा तो संयम से, और सोचूंगा तो केवल आत्मा की शुद्धि।" खाऊंगा तो संयम से
"शांति जिनेश्वर सोलमा, अचिरा सुत वंदो;विश्वसेन कुल नभोमणि, भविजन सुख कंदो।मृग लंछन जिन आउखु, लाख वरस प्रमाण;हत्थीणापुर नयरी धणी, प्रभुजी गुण मणि खाण।"
चैत्र सुदी पूनम दिने, पाल्या उत्तम भाव;कर्म तणा बंधन तजी, लीधो मोक्ष प्रभाव।तेहना चरणनी रज थकी, पावन थाय शरीर;पुंडरीक नामे पामिए, भवसागरनो तीर।
5. पंचम चैत्यवंदन: मूलनायक आदिनाथ भगवान चैत्यवंदन